Tuesday, May 11, 2010

Arrey O Sambha !!! Mac Mohan Passes Away

पुरे पचास हजार



















Sambha !... We will miss you !


Tribute to Sambha!


Macmohan, the character actor, who shot to fame as the gun-toting Sambha in Ramesh Sippy’s classic Sholay (1975) passed away yesterday in Andheri after a prolonged battle with cancer. He was 71



Macmohan, whose real name is Mohan Makhijani,










Started his career with the film Haqeeqat in 1964,
acted in over 190 films in a career spanning 46 years.

Some of his films included
Don, Sholay, Karz, Satte Pe Satta, Zanjeer, Rafoo Chakkar, Shaan and Khoon Pasina .

His las
t film was Luck By Chance where he made a special appearance as himself.

Sambha never get a chance to perform other role. But he created a example.

































http://movies.indiatimes.com/photo.cms?msid=5916391


Friday, May 7, 2010

Marathi Rain Song पाऊस गाणे



पावसाच्या पहिल्या धारेनं सुखावले सारे

छत्र्या रेनकोट पिशव्या शोधू लागले सारे
उडाली धांदल उडाले पत्रे उधाणता वारे। पावसाचे।।



पाऊसही अवली।
ओतितो बादली ।
बेसावध जन। सापडिता।।


काही आनंदी।
काही कष्टी।
काही प्रेमिक। जनांमध्ये।।


पोरे ही खूष।
आया नाखूष।
कपडेही ओले। वाळता वाळेना।।


रस्ताही ओला।
सीटही ओले।
त्यातही फाटलेले। सारे चिंब।।


रस्तेही बाके।
खड्डेही बाके।
चिखलही बाका। मनपाचा।।


बसही फुल्ल।
रिक्षाही फुल्ल।
खोळंबती जन। दुकानाकडेने।।


ऑफिस सुटताना।
शाळा सुटताना।
अवचित घाला। पावसाचा।।


झाला खोळंबा।
झाली पंचाईत।

तरीही आनंदी। जनलोक।।

कुणा आठवे गेलेले बालपण।


कोणी रमे त्या रम्य आठवणीत।
कुणी शोधू पाहे लपलेले सूर्यबिंब।
कोणी लकी प्रेमिक आतूनही चिंब अन बाहेरूनी चिंब।।

एका छोट्या लेकराचा।
हां पहिला पाऊस।
तो उधाणून वाहे। याच्या चेहऱ्यावरून।।


आईही तृप्त।
बाबाही तृप्त।
कुटुंबच तृप्त। लेकराचे।।


चला चला उठा झणी।
करा पावसाची तयारी।
दारेही फुगली। बाथरूमची।।


पावसाच्या धुंदीत।
गेली संध्याकाळ।
घरोघरी तळण। कांदाभजीचे।।


उजाडता दिस।
मन प्रसन्न प्रसन्न।
आला की हो पाऊस। श्रांतवावया।।


ऑफिसाच्या गडबडीत।
सौ बोले श्रीयुतांना।
येत्या रविवारी गाठूया। आपण लोणावळा।।


श्री खूष।
सौ खूष।

पाऊसही खूष। करितो फजितवडा।।


अवली पावसाला।
भेटे त्याची सखी।
तो ना सोडे आता। तिचे अंतःपूर।।


तिची माझी भेट।
फक्त एका सिझनची।
तीही सोसूनी कळ। आठ आठ मासांची।।


तुम्ही जन लकी।
रोज पाहता सखी।
पुन्हा उतावीळ तुम्ही। भिजावया।।


जरा काढा थोडी कळ।
वेधशाळा घेते वळ।
तुम्ही घातलेल्या। अपशब्दांचे।।


आतुर त्या जनांना।
नया कळे विरह व्यथा।
कैसी ही माया। परमेश्‍वराची।।


पाऊस प्रेमिक।
रमला क्षणिक।
झोप उडवून। सर्वांची।।


आहो पाऊस राया।
मान्य तुमची माया।
परंतु आताथोडे । बाहेरही डोकवा।।


घामाने चिंब।
आतून बाहेरून।
जनही सारे। पिडलेले।।


तुम्ही रमलात।
रमणीमधेच।
तुमचा सीझन। लाटला सूर्याने।।


जनही दुःखी।
सूर्यही कोपे।
कसे साहू देवा। मन हे हळवे।।


आता करा त्वरा।
मान्सुनही आला।
सुरू झाल्या हाका। पेपरांमधी।।


तुम्ही फार थोर।
लावुनिया जोर।
वर्षवाव्या धारा। ढगांतुनी।।


बालक सुस्नात।
प्रेमिक सुस्नात।
धराही सुस्नात। करवून टाका।।


मिळून निसटावे।
निसटून मिळावे।
हाच खेळ सारा। संचिताचा।।


तेच संचित जोडून।
दोन्ही करही जोडून।
करितो विनंती। आता तरी कोसळा।।


आता तरी कोसळा।

सारे चिंब भिजवा।
नाहीतर पुन्हा गाईन। मोठे पावसाचे गाणे।।


ही धमकी नसे।
वा नसे चेतावणी।
आहे ही आर्तता। तुमच्या सुडोकूची।।



विडंबन








व्हिस्कीच्या पहिल्या पेगनं सुखावले सारे

डाळ शेव फुटाणे शोधू लागले सारे


उडाली धांदल खणखणले ग्लास उधाणता वारे। व्हिस्कीचे।।
व्हिस्कीही अवली।
ओतितो बाटली ।
बेसावध जन। पीतापीता।।


काही आनंदी।
काही कष्टी।
काही ताशीर। जनांमध्ये।।


मॅनेजर ही खूष।
वेटर नाखूष।
टेबलक्लॉथ ओले। वाळता वाळेना।।


ग्लासही ओला।
कस्टमर ओले।
त्यातही फाटलेले। सोफ्याचे कुशन।।


ग्लासही झुके।
बाटलीही झुके।
समोरचाही झुके। बोलताना।।


खुर्च्याही फुल्ल।
कोचही फुल्ल।
खोळंबती जन। दारुच्या आशेने।।


बाटली फोडताना।
ग्लास भरताना।
अवचित घाला। विज मंडळाचा।।


झाला खोळंबा।
झाली पंचाईत।
तरीही आनंदी। मद्यलोक।।


कुणा आठवे गेलेले बालपण।
कोणी रमे त्या रम्य आठवणीत।
कुणी शोधू पाहे लपलेले सूर्यबिंब।
कोणी लकी प्रेमिक आतूनही चिंब अन बाहेरूनी चिंब।।


एका छोट्या मदिरभक्ताचा।
हा पहिला पेग।
चिंता उधाणून वाहे। याच्या चेहऱ्यावरून।।


जीव्हाही तृप्त।
मनही तृप्त।
आयुष्य तृप्त। भक्ताचे।।


चला चला उठा झणी।
करा पार्टीची तयारी।
दारेही उघडलेली। वाईन शॉपची।।


मदिरेच्या धुंदीत।
गेली संध्याकाळ।
घरोघरी चकणा तळण। कांदाभजीचे।।


उजाडता दिस।
मेंदु सुन्न सुन्न।
घ्या की हो उतारा। उतरावावया।|


पिण्याच्या गडबडीत।
श्री बोले श्रीमतींना।
येत्या रविवारी गाठ तु। माहेरचा मळा।।


आपण खूष।
मित्र खूष।
बायकोही खूष। मिळाले माहेरी जावया।।


अवली दारुड्याला।
भेटे त्याची बाटली।
तो ना सोडे आता। तिचा पदर।।


त्याची तिची भेट।

फक्त एका रात्रीची।
तीही सोसूनी कळ।

९८ रुपड्यांची।।



तुम्ही जन लकी।

रोज ४ पेग मुखी।

पुन्हा उतावीळ तुम्ही। फुकटची प्यावया।।


चला काढा थोडी हाल्फ।
पेग मारता येते बळ।
तुम्ही साकारलेल्या। कॉकटेलने।।


निर्व्यसनी त्या जनांना।
ना कळे मदिराभक्ताची व्यथा।
कैसी ही माया। मदिरेची।।


आपण प्रेमिक।
घेउन मिठीत।
रंग उडवू। मदिरेचे।।


आहो भाऊ राया।
मान्य तुमची माया।
परंतु आता थोडे । भुकेकडे बघा।।


दारुने टिंग।
आतून बाहेरून।
चकणेही सारे। विखुरलेले।।


तुम्ही म्हणालात।
पितान मधेच।
तुमचे पाकिट। लाटले चोराने।।


जाहलो दुःखी।
हातही कापे।

कसे भरु देवा। बिल हे सगळे ।।

आता करा त्वरा।

वेटरही आला।
सुरू झाल्या हाका। मॅनेजरच्या।।


तुम्ही फार थोर।
लावुनिया घोर।
बेरकी नजरा। चश्म्यातुनी।।


मालक पुढ्यात।
वेटर पुढ्यात।

धराहे बिल। पेमेंट टाका।।


मिळून निसटावे।
कहितरी घडावे।
हाउ दे खेळ चालु । विज मंडळाचा।।


पुर्व संचित जोडून।
दोन्ही करही जोडून।
करितो विनंती। आता तरी गुल्ल व्हा।।

आता तरी गुल्ल व्हा।


अंधारात गायब होउ द्या।
नाहीतर नशीबी पिउन। ग्लास प्लेट विसळणे।।


ही रडकथा नसे।
वा नसे बतावणी।
आहे ही आर्तता। तुमच्या


मृत्युंजयाची।।


Difference Between Girl & Woman

Difference Between Girl & Woman
Girls leave their schedule wide-open and wait for a guy to call and make plans.
Grown women make their own plans and nicely tell the guy to get in where he fits

Girls want to control the man in their life.
Grown women know that if he's truly hers, he doesn't need controlling.

Girls check you for not calling them.
Grown women are too busy to realize you hadn't.

Girls are afraid to be alone.
Grown women revel in it-using it as a time for personal growth.

Girls ignore the good guys.
Grown women ignore the bad guys.

Girls make you come home.
Grown women make you want to come home.

Girls worry about not being pretty and/or good enough for their man.
Grown women know that they are pretty and/or good enough for any man.

Girls try to monopolize all their man's time ( I.e., don't want him hanging with his friends).
Grown women realize that a lil' bit of space makes the 'together time' even more special-and goes to kick it with her own friends!

Girls think a guy crying is weak. Grown women offer their shoulder and a tissue.
Girls want to be spoiled and 'tell' their man so.

Grown women 'show' him and make him comfortable enough to reciprocate without fear of losing his 'manhood'.
Girls get hurt by one man and make all men pay for it.

Grown women know that that was just one man. Girls fall in love and chase aimlessly after the object of their affection, ignoring all 'signs'.
Grown women know that sometimes the one you love, don't always love you back-and move on, without bitterness.